अयोध्या से विशेष! अयोध्या के सबसे ‘अपडेटेड’ और कैमरों के चहेते संत जगतगुरु परमहंस आचार्य ने इस बार केवल शब्दों के बाण नहीं चलाए, बल्कि ऐसा लगता है कि उन्होंने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की ‘राजनैतिक और आध्यात्मिक जन्मकुंडली’ का भी गहरा अध्ययन कर लिया है। परमहंस जी का अंदाज ऐसा था मानो वो साक्षात ‘शनि देव’ बनकर न्याय करने बैठे हों!
कुंडली में ‘बड़बोलेपन’ का योग!
परमहंस आचार्य ने जिस तरह से अविमुक्तेश्वरानंद की खिंचाई की, उसे देखकर तो यही लगता है कि स्वामी जी की कुंडली में ‘वाक-दोष’ और ‘विवाद-योग’ का तगड़ा गठबंधन चल रहा है। परमहंस जी ने चुटकी लेते हुए संकेत दिया कि:
“स्वामी जी, आपके ग्रहों की दशा फिलहाल ‘योगी-विरोध’ के नक्षत्र में फंसी हुई है। जब कुंडली में ‘विवेक’ का खाना खाली हो और ‘अहंकार’ का राहु सातवें आसमान पर हो, तभी इंसान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जैसे कर्मयोगी पर उंगली उठाता है।”
“प्रायश्चित” ही है एकमात्र ‘महाउपाय’
ज्योतिषीय तंज कसते हुए परमहंस आचार्य ने स्पष्ट कर दिया कि इस विवाद का कोई ‘रत्न’ या ‘अंगूठी’ समाधान नहीं है। उन्होंने मजाकिया लहजे में समझाया:
दशा सुधारने का तरीका: योगी जी के चरणों में जाकर क्षमा याचना करना ही सबसे बड़ा ‘ग्रह शांति’ पाठ है।
सावधानी हटी, गरिमा घटी: अगर अविमुक्तेश्वरानंद जी ने अपने नाम के आगे लगे ‘स्वामी’ शब्द की मर्यादा नहीं रखी, तो जनता की अदालत में उनकी साख का ‘केतु’ भारी पड़ सकता है।
परमहंस का ‘दिव्य’ चश्मा!
लोग कहते हैं कि परमहंस आचार्य खुद अपनी ‘कुंडली’ में ‘मीडिया-दृष्टि’ लेकर पैदा हुए हैं। उन्होंने बड़ी चतुराई से यह संदेश दे दिया कि योगी जी का दिल इतना विशाल है कि वो ‘क्षमा’ का दान कर सकते हैं, लेकिन क्या अविमुक्तेश्वरानंद के पास ‘झुकने’ का साहस है!
परमहंस जी का साफ कहना है— “नाम बड़ा होने से कोई महान नहीं होता, कुंडली के ग्रहों को ‘शांति’ देने के लिए जुबान को भी शांत रखना पड़ता है।”
परिणाम : अब देखना यह होगा कि अविमुक्तेश्वरानंद जी अपनी ‘ग्रह दशा’ सुधारने के लिए परमहंस जी की सलाह मानते हैं, या फिर अयोध्या के ये ‘तेजतर्रार’ आचार्य अपनी अगली भविष्यवाणी में किसी और की कुंडली के पन्ने पलटेंगे!
- इंद्र यादव – ईशान टाइम्स,मुंबई



