भदोही।
उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, भदोही ने हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम अस्वीकार करने के मामले में बीमा कंपनी को उपचार व्यय, ब्याज एवं जुर्माना अदा करने का आदेश दिया है। आयोग के इस आदेश को उपभोक्ता संरक्षण के क्षेत्र में एक अहम उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार परिवादिनी शालिनी मिश्रा, पुत्री शिव प्रसाद मिश्रा, निवासी कान्तपुर पोस्ट, थाना चौरी, जनपद भदोही द्वारा प्रबंधक आदित्य बिरला कैपिटल हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (पंजीकृत कार्यालय सेनापति मार्ग, मुंबई) के विरुद्ध परिवाद दायर किया गया था। परिवादिनी का कहना था कि उनके द्वारा क्रय की गई हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी के अंतर्गत इलाज पर हुए व्यय का भुगतान बीमा कंपनी द्वारा अस्वीकार कर दिया गया, जिससे उन्हें आर्थिक व मानसिक क्षति उठानी पड़ी।
मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने उपलब्ध अभिलेखों एवं पक्षकारों के तर्कों का परीक्षण करते हुए पाया कि बीमा कंपनी द्वारा दावा अस्वीकार किया जाना सेवा में कमी की श्रेणी में आता है। आयोग ने अपने आदेश में बीमा कंपनी पर ₹15,000 का जुर्माना लगाते हुए निर्देश दिया कि परिवादिनी को इलाज पर खर्च हुए ₹1,72,685 का भुगतान किया जाए। साथ ही उक्त धनराशि पर क्लेम अस्वीकृति की तिथि 12 नवंबर 2024 से निर्णय तिथि 13 फरवरी 2026 तक 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज भी देय होगा।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि आदेश का पालन दो माह की निर्धारित अवधि के भीतर नहीं किया जाता है, तो देय समस्त धनराशि पर 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से भुगतान करना होगा।
उल्लेखनीय है कि इस प्रकरण में परिवादिनी की ओर से अधिवक्ता सत्य कुमार दुबे द्वारा प्रभावी पैरवी की गई। जानकारी जिला उपभोक्ता आयोग के रीडर स्वतंत्र रावत द्वारा उपलब्ध कराई गई। निर्णय जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष संजय कुमार डे एवं महिला सदस्य दीप्ति श्रीवास्तव द्वारा हस्ताक्षरित कर निर्गत किया गया।
यह प्रकरण इस तथ्य को रेखांकित करता है कि यदि उपभोक्ता अपने अधिकारों के प्रति सजग रहते हुए विधिक मंच की शरण लेते हैं, तो उन्हें न्याय प्राप्त हो सकता है। माना जा रहा है कि यदि परिवादिनी उपभोक्ता आयोग तक नहीं पहुंचतीं, तो संभवतः उन्हें अपनी बीमा पॉलिसी के अंतर्गत उपचार पर व्यय की गई राशि का भुगतान प्राप्त नहीं हो पाता।



