हस्तनिर्मित कालीन निर्यात को वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने पर जोर
नई दिल्ली, 30 मार्च 2026। Carpet Export Promotion Council (सीईपीसी) की 208वीं प्रशासनिक समिति (सीओए) की बैठक आज नई दिल्ली में परिषद के अध्यक्ष कैप्टन मुकेश कुमार गोंबर की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक हाइब्रिड मोड में संपन्न हुई, जिसमें सदस्य भौतिक एवं वर्चुअल दोनों माध्यमों से शामिल हुए।
बैठक में हस्तनिर्मित कालीन उद्योग की वृद्धि और निर्यात संवर्धन से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। परिषद ने भारतीय हस्तनिर्मित कालीनों की वैश्विक स्थिति को सुदृढ़ करने और निर्यातकों को बेहतर सहयोग प्रदान करने के उपायों पर विचार-विमर्श किया।
‘कलीन लेबल’ को बढ़ावा देने पर जोर
बैठक का एक प्रमुख एजेंडा “कलीन लेबल” के व्यापक प्रचार-प्रसार और उपयोग को बढ़ावा देना रहा। इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय हस्तनिर्मित कालीनों की प्रामाणिकता, गुणवत्ता आश्वासन और ब्रांड पहचान को सुदृढ़ करना है।
वैश्विक दृश्यता बढ़ाने की रणनीति
परिषद ने लक्षित प्रचार एवं ब्रांडिंग अभियानों के माध्यम से प्रमुख अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पहुंच बढ़ाने पर बल दिया। आगामी अंतरराष्ट्रीय और घरेलू व्यापार मेलों व प्रदर्शनियों में भागीदारी के लिए विस्तृत रोडमैप पर भी चर्चा की गई, ताकि निर्यातकों को अधिकतम व्यावसायिक अवसर मिल सकें और भारत की वैश्विक उपस्थिति मजबूत हो।
सदस्यता शुल्क संरचना की होगी समीक्षा
सीओए ने वार्षिक सदस्यता शुल्क संरचना की पुनः समीक्षा की आवश्यकता पर विचार किया। इस संबंध में परिषद उचित संवैधानिक प्रक्रिया अपनाते हुए प्रस्ताव को वार्षिक आम बैठक (एजीएम) में प्रस्तुत करेगी तथा आवश्यक सरकारी अनुमोदन प्राप्त करेगी। उद्देश्य छोटे निर्यातकों के लिए शुल्क को अधिक किफायती और सहयोगी बनाना है, साथ ही परिषद की गतिविधियों को सुचारु रूप से जारी रखना भी सुनिश्चित किया जाएगा।
डीजीएफटी से प्राधिकरण लेने का निर्णय
निर्यात प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए परिषद ने Directorate General of Foreign Trade (डीजीएफटी) से उत्पत्ति प्रमाण पत्र (सीओओ) जारी करने हेतु प्राधिकरण प्राप्त करने का निर्णय लिया है। इससे निर्यातकों को दस्तावेजी औपचारिकताओं में सहूलियत मिलने की उम्मीद है।
बैठक में उपाध्यक्ष श्री असलम महबूब सहित सीओए के अनेक सदस्यों ने सक्रिय भागीदारी की। कार्यवाहक कार्यकारी निदेशक डॉ. स्मिता नागरकोटी भी उपस्थित रहीं।
बैठक का समापन भारतीय हस्तनिर्मित कालीन क्षेत्र के सतत विकास और वैश्विक प्रचार-प्रसार के लिए सक्रिय एवं ठोस कदम उठाने की सामूहिक प्रतिबद्धता के साथ हुआ।



