मुंबई (इंद्र यादव) देश में साइबर अपराधियों के हौसले इस कदर बुलंद हो गए हैं कि अब वे कानून की दहलीज लांघकर सीधे ‘जज साहब’ की जेब तक जा पहुंचे हैं। मुंबई से आई एक सनसनीखेज खबर ने सुरक्षा और डिजिटल बैंकिंग के दावों की पोल खोल दी है। बॉम्बे हाई कोर्ट के एक मौजूदा जज से क्रेडिट कार्ड पॉइंट्स रिडीम करने के नाम पर 6 लाख रुपये से अधिक की ठगी कर ली गई।
कैसे बुना गया ठगी का जाल
घटना की शुरुआत एक साधारण सी जरूरत से हुई। जज साहब अपने क्रेडिट कार्ड के पॉइंट्स रिडीम करना चाहते थे। उन्होंने सर्च इंजन (Google) पर बैंक के कस्टमर केयर का नंबर खोजा। यहीं वे अपराधियों के ‘सर्च इंजन लिस्टिंग फ्रॉड’ का शिकार हो गए।
फर्जी प्रतिनिधि: ऑनलाइन मिले नंबर पर कॉल करने पर सामने वाले ठग ने खुद को बैंक का अधिकारी बताया।
घातक लिंक: ठग ने जज को झांसे में लेकर एक लिंक भेजा और एक मोबाइल ऐप डाउनलोड करने को कहा।
डेटा चोरी: जैसे ही जज ने उस ऐप पर अपने कार्ड की डिटेल्स भरीं, उनके फोन का एक्सेस अपराधियों के पास चला गया।
पलक झपकते ही सफाया: देखते ही देखते चार ट्रांजैक्शन हुए और जज के खाते से 6,02,566 रुपये उड़ा लिए गए।
आंकड़े जो डराते हैं: साइबर अपराध की सुनामी
यह मामला सिर्फ एक जज की ठगी का नहीं है, बल्कि देश में फैल रहे ‘डिजिटल वायरस’ का प्रमाण है।
भारत में प्रतिदिन 5,000+ दर्ज शिकायतों, 60% फर्जी कस्टमर केयर धोखाधड़ी और मात्र 2% से 5% की बेहद कम रिकवरी रेट के साथ यह मामला देश में फैल रहे ‘डिजिटल वायरस’ का एक भयावह प्रमाण है।
जज और आम नागरिक: एक ही नाव में सवार
इस घटना ने एक कड़वा सच उजागर किया है। एक आम नागरिक जब ठगा जाता है, तो वह पुलिस और कानून से न्याय की उम्मीद करता है। लेकिन जब खुद एक हाई कोर्ट का जज, जो दिन-रात पेचीदा कानूनी गुत्थियां सुलझाते हैं, इस जाल में फंस जाएं, तो समाज में असुरक्षा की भावना गहराना लाजमी है। यह ‘दर्द’ साझा है—तकनीक की बारीकियों के सामने एक अनपढ़ मजदूर और एक विद्वान न्यायाधीश, दोनों आज समान रूप से असुरक्षित नजर आ रहे हैं।
“जब कानून की व्याख्या करने वाले हाथ भी साइबर ठगों के निशाने पर हों, तो समझ लीजिए कि अपराधी अब तकनीक के अंधेरे में पूरी तरह बेखौफ हो चुके हैं।” -इंद्र यादव
पुलिसिया कार्रवाई
शिकायत के बाद कफ परेड पुलिस ने भारतीय दंड संहिता (BNS) की धारा 318(4) और 319(2) के साथ-साथ आईटी एक्ट की धारा 66, 66(A) और 66(D) के तहत मामला दर्ज किया है। फिलहाल पुलिस उन बैंक खातों और आईपी एड्रेस को ट्रैक कर रही है जहां पैसे ट्रांसफर किए गए हैं।
सावधान रहें: ये 3 गलतियां न करें
Google पर भरोसा: कभी भी बैंक का कस्टमर केयर नंबर सर्च इंजन से न उठाएं। हमेशा बैंक की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप का इस्तेमाल करें।
अनजान ऐप: किसी के कहने पर ‘AnyDesk’ या ‘TeamViewer’ जैसा कोई भी रिमोट एक्सेस ऐप डाउनलोड न करें।
लिंक पर क्लिक: बैंक कभी भी पिन या ओटीपी मांगने के लिए लिंक नहीं भेजता।



