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बिजली उपभोक्ताओं के अधिकार पर डाका: प्रीपेड मीटर थोपना कानून के खिलाफ, परिषद ने खोला मोर्चा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया को लेकर विवाद गहरा गया है। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने बिजली कंपनियों पर सीधा हमला बोलते हुए कहा है कि उपभोक्ताओं को पोस्ट-पेड या प्री-पेड स्मार्ट मीटर चुनने का वैधानिक अधिकार है। परिषद ने आरोप लगाया कि बिजली कंपनियां विद्युत अधिनियम 2003 का सरेआम उल्लंघन कर रही हैं।

कानूनी अधिकार का हवाला

​उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में सार्वजनिक किए गए इलेक्ट्रिसिटी (संशोधन) बिल 2025 में भी विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसका सीधा अर्थ यह है कि उपभोक्ताओं के पास आज भी यह विकल्प सुरक्षित है कि वे अपनी सुविधा के अनुसार पोस्ट-पेड मीटर चुनें या प्री-पेड। इसके बावजूद बिजली कंपनियां नियम विरुद्ध तरीके से उपभोक्ताओं पर प्री-पेड मीटर थोप रही हैं।

नियामक आयोग ने पावर कॉरपोरेशन को घेरा

​परिषद की शिकायत पर कड़ा रुख अपनाते हुए विद्युत नियामक आयोग ने पावर कॉरपोरेशन को नोटिस जारी किया है। आयोग ने मीटर की लागत और चयन की प्रक्रिया पर कॉरपोरेशन से 15 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। परिषद का दावा है कि कंपनियों की मंशा उपभोक्ताओं के हितों को नजरअंदाज कर लाभ कमाने की है।

दरों में बढ़ोतरी को बताया ‘साजिश’

​परिषद ने बिजली की दरों में 28 से 45 प्रतिशत तक की संभावित वृद्धि का भी पर्दाफाश किया है। श्री वर्मा ने कहा कि:

  • ​बिजली कंपनियों के पास उपभोक्ताओं का लगभग 33,122 करोड़ रुपये अतिरिक्त जमा है।
  • ​नियम के अनुसार, वार्षिक राजस्व आवश्यकता स्वीकार होने के 120 दिनों के भीतर नई दरों की घोषणा होनी चाहिए थी।
  • ​अब 165 दिन से अधिक बीत चुके हैं, ऐसे में दरें बढ़ाने का कोई विधिक आधार नहीं बचता।

मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग

​परिषद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने और उपभोक्ताओं के हित में निर्णय लेने की अपील की है। परिषद ने चेतावनी दी है कि यदि बिजली कंपनियों ने अपनी मनमानी नहीं रोकी, तो उपभोक्ताओं के हक के लिए प्रदेश स्तर पर आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी।

उपभोक्ता ध्यान दें:

  1. ​आपके पास चुनने का अधिकार है कि आप पुराना बिल सिस्टम (पोस्ट-पेड) रखना चाहते हैं या पहले रिचार्ज वाला (प्री-पेड)।
  2. ​यदि कंपनियां दबाव डालें, तो आप विद्युत अधिनियम की धारा 47(5) का हवाला दे सकते हैं।
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