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‘शिक्षा के मंदिर से देहव्यापार के दलदल तक! एक सामाजिक पतन!

स्वतंत्र लेखक इंद्र यादव

ठाणे,मुंबई (इंद्र यादव) भाईंदर, आज जब हम डिजिटल इंडिया और महिला सशक्तिकरण की बातें कर रहे हैं, वहीं हमारे समाज के भीतर ‘जिस्मफरोशी’ का एक ऐसा दीमक लगा है जो कॉलेज जाने वाली युवा पीढ़ी को खोखला कर रहा है। हाल ही में मीरा-भाईंदर, वसई-विरार (MBVV) पुलिस आयुक्तालय के अंतर्गत नवघर पुलिस स्टेशन की टीम ने एक ऐसी ही घिनौनी साजिश का पर्दाफाश किया है।

छापेमारी और रेस्क्यू ऑपरेशन

पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि भाईंदर (पूर्व) रेलवे स्टेशन के पास स्थित ‘सुरभि वडापाव’ और ‘प्रशांत होटल’ के आसपास अनैतिक देहव्यापार का खेल चल रहा है। पुलिस ने जाल बिछाया और एक बोगस ग्राहक (Fake Customer) भेजकर इस गिरोह का भंडाफोड़ किया। इस कार्रवाई में एक महिला दलाल को रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया और मुंबई के एक नामी कॉलेज में पढ़ने वाली फर्स्ट ईयर की छात्रा को रेस्क्यू किया गया।

स्मार्टफोन का खौफनाक इस्तेमाल

पकड़ी गई महिला दलाल पिछले 4-5 सालों से मुंबई, मीरा-भाईंदर और वसई-विरार इलाकों में सक्रिय थी। उसका काम करने का तरीका बेहद शातिराना था। वह ग्राहकों को व्हाट्सएप पर कॉलेज की लड़कियों की तस्वीरें भेजती थी और ऊंचे दामों पर उनका सौदा करती थी। सवाल यह उठता है कि क्या आधुनिक तकनीक हमारी सुरक्षा के लिए है या फिर ऐसे ‘गोरखधंधों’ को बढ़ावा देने के लिए!

सामाजिक चिंतन: कहाँ चूक हो रही है!

एक मध्यमवर्गीय परिवार की लड़की, जो अपने सुनहरे भविष्य के सपने लेकर कॉलेज में कदम रखती है, वह इस दलदल में कैसे पहुँच गई! इसके पीछे कई कड़वे सच हो सकते हैं!
आर्थिक दबाव: क्या पढ़ाई का खर्च या लग्जरी लाइफस्टाइल की चाहत लड़कियों को इन दलालों के जाल में फंसा रही है?
सोशल मीडिया और अकेलापन: दलाल अक्सर सोशल मीडिया के जरिए मासूम लड़कियों को टारगेट करते हैं, उन्हें इमोशनल सपोर्ट या नौकरी का झांसा देकर फंसाते हैं।
निगरानी की कमी: माता-पिता और शैक्षणिक संस्थानों को यह सोचने की जरूरत है कि उनके बच्चे कॉलेज के घंटों के दौरान और मोबाइल फोन पर क्या कर रहे हैं।

कानूनी कार्रवाई और पुलिस की सक्रियता

गिरफ्तार महिला आरोपी पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) और अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम (PITA Act) के तहत कड़ी कार्रवाई की जा रही है। रेस्क्यू की गई छात्रा को सुधार गृह भेजा गया है ताकि उसकी काउंसलिंग की जा सके और उसे समाज की मुख्यधारा में वापस लाया जा सके।
यह सफल ऑपरेशन MBVV आयुक्तालय के वरिष्ठ अधिकारियों, जोन-1 के DCP राहुल चव्हाण (IPS) और नवघर पुलिस स्टेशन के सीनियर PI धीरज कोली के मार्गदर्शन में अंजाम दिया गया। इस टीम में PI दत्तात्रय ढूमे, PSI संदीप व्हसकोटी, ASI रविकांत व्हनमारे और उनकी पूरी टीम का योगदान सराहनीय है।

निष्कर्ष

पुलिस अपना काम कर रही है, लेकिन एक समाज के तौर पर हमारी भी जिम्मेदारी है। यदि आप अपने आस-पास किसी भी संदिग्ध गतिविधि को देखते हैं, तो चुप न रहें। आज किसी और की बेटी इस दलदल में फंसी है, कल कोई भी इसका शिकार हो सकता है। ‘भय मुक्त’ समाज तभी बनेगा जब पुलिस की सख्ती और जनता की सतर्कता एक साथ काम करेगी।

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