सनसनीखेज खुलासा!शंकराचार्य को फंसाने की साजिश बेनकाब, बेटियों को मोहरा बनाने वाला पिता खुद ही फूट-फूट कर रोया !
मुंबई! वाराणसी/प्रयागराज: सनातन धर्म के सर्वोच्च पदों में से एक, ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ रची गई ‘यौन शोषण’ की घिनौनी साजिश का भंडाफोड़ हो गया है। जिस पिता ने अपनी नाबालिग बेटियों के साथ दुराचार का आरोप लगाकर अदालत का दरवाजा खटखटाया था, उसी ने आज कैमरे के सामने कुबूल कर लिया कि यह सब चंद नोटों और दबाव के खेल का हिस्सा था।
षड्यंत्र का मुख्य सूत्रधार: हिस्ट्रीशीटर आशुतोष ब्रह्मचारी
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला नाम आशुतोष ब्रह्मचारी (पाण्डेय) का सामने आया है। रमाशंकर दीक्षित नामक पत्रकार ने खुलासा किया कि आशुतोष ने ही उसे लालच दिया था कि वह शंकराचार्य पर अपनी बेटियों के यौन शोषण का झूठा आरोप लगाए।
अपराधिक रिकॉर्ड: आशुतोष ब्रह्मचारी कोई साधारण व्यक्ति नहीं, बल्कि गोकशी और लूट जैसे दर्जनों मामलों में संलिप्त एक हिस्ट्रीशीटर है।
विवादित कनेक्शन: चर्चाएं तेज हैं कि आशुतोष का संबंध रामभद्राचार्य खेमे से है। बताया जा रहा है कि माघ मेले के दौरान प्रशासन और शंकराचार्य के बीच हुए विवाद के बाद, इस हिस्ट्रीशीटर को ‘मोहरे’ के तौर पर इस्तेमाल कर शंकराचार्य की छवि धूमिल करने की कोशिश की गई।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में खुला राज: “मेरी आत्मा ने गवाही नहीं दी
शाहजहांपुर के स्थानीय टीवी पत्रकार रमाशंकर दीक्षित ने केदारघाट पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपनी आपबीती सुनाते हुए सबको सन्न कर दिया। दीक्षित के अनुसार!
व्हाट्सएप कॉल पर डील: आशुतोष ब्रह्मचारी ने व्हाट्सएप कॉल के जरिए दीक्षित से संपर्क किया और बद्रीनाथ में बच्चियों के साथ गलत काम होने का झूठा केस दर्ज कराने को कहा।
आर्थिक प्रलोभन: इसके बदले में दीक्षित को भारी आर्थिक मदद का लालच दिया गया।
धमकी का दौर: जब दीक्षित ने यह कहते हुए इनकार किया कि उसके पिता भी एक ‘दंडी संन्यासी’ थे और वह एक शंकराचार्य को झूठे केस में नहीं फंसा सकता, तो आशुतोष उसे जान से मारने और बर्बाद करने की धमकियां देने लगा।
“भगवान ने हमें जितना दिया, हम उसमें संतुष्ट हैं। मैं किसी संत को झूठे आरोप में फंसाने का पाप नहीं कर सकता।” — रमाशंकर दीक्षित (आरोप लगाने वाला पिता)
रामभद्राचार्य बनाम अविमुक्तेश्वरानंद: संतों के बीच छिड़ा छद्म युद्ध !
इस खुलासे ने धार्मिक जगत में भूचाल ला दिया है। जानकारों का मानना है कि दोनों खेमों के बीच लंबे समय से चल रही तनातनी अब इस निचले स्तर तक पहुंच जाएगी, इसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी। हिस्ट्रीशीटर आशुतोष का रामभद्राचार्य के खेमे में सक्रिय होना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। क्या वाकई यह केवल एक अपराधी की निजी साजिश है, या इसके पीछे कोई बहुत बड़ा ‘पावर गेम’ चल रहा है!
आगे क्या:शंकराचार्य के समर्थकों में भारी आक्रोश है। इस खुलासे के बाद अब गेंद पुलिस और प्रशासन के पाले में है। एक तरफ जहां शंकराचार्य की बेगुनाही के सबूत सामने आए हैं, वहीं दूसरी ओर एक हिस्ट्रीशीटर द्वारा धर्म की आड़ में रची गई इस साजिश ने न्याय व्यवस्था और धार्मिक शुचिता पर गहरे सवालिया निशान लगा दिए हैं।
- इंद्र यादव – ईशान टाइम्स, मुंबई



