सावधान भदोही !
भदोही। शहर की गलियों में सजे ठेलों से उठती खुशबू, कड़ाहों में छनते पकवान और चटपटे स्वाद का आकर्षण—यह दृश्य जितना लुभावना है, उतना ही चिंताजनक भी। बाजारों में खुलेआम बिक रहे खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर अब गंभीर प्रश्न उठने लगे हैं। आम नागरिकों के मन में यह शंका घर कर रही है कि कहीं यह चटखारा उनकी सेहत पर भारी न पड़ जाए।
स्वाद और सुविधा की दौड़ में लोग घर की रसोई से दूर होते जा रहे हैं। वहीं, मुनाफे की प्रतिस्पर्धा में कुछ दुकानदार कथित रूप से घटिया सामग्री और हानिकारक रसायनों का सहारा ले रहे हैं। कम लागत और अधिक लाभ की यह प्रवृत्ति जनस्वास्थ्य पर अदृश्य प्रहार कर रही है।
खाद्य निरीक्षण व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न
सरकार ने खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निरीक्षकों की नियुक्ति की है, जिनका दायित्व दुकानों की नियमित जांच और खाद्य पदार्थों की सैंपलिंग करना है। किंतु स्थानीय स्तर पर यह आरोप उभर रहे हैं कि अनेक प्रतिष्ठान बिना पंजीकरण के संचालित हो रहे हैं और निरीक्षण की प्रक्रिया अपेक्षित सक्रियता से नहीं हो पा रही।
बिना पंजीकरण के फैलता व्यापार
सूत्रों के अनुसार, शहर में बड़ी संख्या में खाद्य सामग्री की दुकानें विधिवत पंजीकरण के बिना ही चल रही हैं। छोटे विक्रेताओं का कहना है कि लाइसेंस प्रक्रिया जटिल और खर्चीली है। वहीं, कुछ लोग इसे प्रशासनिक औपचारिकताओं और कथित भ्रष्टाचार से भी जोड़ते हैं।
सैंपलिंग की सुस्त रफ्तार
खाद्य गुणवत्ता की जांच के लिए नियमित सैंपलिंग आवश्यक है, ताकि मिलावट और अशुद्धता पर अंकुश लगाया जा सके। किंतु नागरिकों का दावा है कि यह प्रक्रिया प्रभावी ढंग से दिखाई नहीं देती, जिससे बाजार में बिक रहे खाद्य पदार्थों की शुद्धता संदेह के घेरे में है।
सेहत पर पड़ता अदृश्य वार
चिकित्सकों का मानना है कि मिलावटी और अस्वच्छ भोजन पेट संबंधी रोगों, फूड पॉइजनिंग और दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। सस्ता और स्वादिष्ट दिखने वाला भोजन धीरे-धीरे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर सकता है।
प्रशासन से सख्त कदम की अपेक्षा
नागरिकों ने जिलाधिकारी से व्यापक जांच अभियान चलाने की मांग की है। उनका कहना है कि बिना लाइसेंस संचालित दुकानों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई हो, नियमित सैंपलिंग सुनिश्चित की जाए और दोषियों को दंडित किया जाए, ताकि जनता का विश्वास कायम रह सके।
जनता से संवेदनशील अपील
स्वास्थ्य ही जीवन का आधार है। स्वाद क्षणिक है, पर सेहत स्थायी। सामाजिक संगठनों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि वे घर के भोजन को प्राथमिकता दें और अस्वच्छ बाजारू खाने से यथासंभव दूरी बनाए रखें।
भदोही की पहचान केवल उसके कालीनों से ही नहीं, बल्कि उसके नागरिकों की सजगता से भी है। समय की मांग है कि प्रशासन अपनी जिम्मेदारी निभाए और जनता भी अपनी थाली के प्रति जागरूक बने—क्योंकि जीवन अमूल्य है, और सेहत उसका आधार।



