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14 साल की ‘फातिमा’, 7 माह का गर्भ! पहले अपहरण, फिर दुराचार और अब ‘जबरन निकाह’!

उत्तर प्रदेश (इंद्र यादव) बिजनौर से एक ऐसी रूह कंपा देने वाली घटना सामने आई है जिसने मानवता और कानून व्यवस्था, दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक 14 वर्षीय मासूम बच्ची, जिसे हम सुरक्षा कारणों से ‘गुड़िया’ कहेंगे, न केवल अपहरण और दुराचार का शिकार हुई, बल्कि रसूखदारों के दबाव में उसे उसी के गुनहगार के साथ निकाह करने पर मजबूर कर दिया गया। आज वह मासूम सात माह की गर्भवती है और न्याय के लिए दर-दर भटक रही है।

अपहरण से लेकर जबरन निकाह तक का खौफनाक सफर

मामला 11 अप्रैल 2025 का है। आरोप है कि बिजनौर के कोतवाली शहर क्षेत्र की रहने वाली ‘गुड़िया’ को उस्मान (पुत्र इरशाद) नामक युवक बहला-फुसलाकर कश्मीर ले गया। वहां उसने मासूम के साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए और फिर उसे अकेला छोड़कर फरार हो गया। कश्मीर की एक सामाजिक संस्था ‘मैंत्रा’ ने बच्ची को रेस्क्यू किया और परिजनों को सूचित किया।
पीड़िता की मां रूही बानो (बदला हुआ नाम) जब अपनी बेटी को लेकर बिजनौर लौटीं और पुलिस के पास गईं, तो न्याय मिलने के बजाय उन्हें समझौते का दबाव झेलना पड़ा। आरोप है कि पेदा चौकी के तत्कालीन उप-निरीक्षक ने मामले में सख्त कार्रवाई करने के बजाय दोनों पक्षों को बैठाकर मामला रफा-दफा करने की कोशिश की।

आरोपियों की लंबी फेहरिस्त: कौन-कौन है शामिल!

पीड़िता की मां के अनुसार, जब पुलिस ने ठोस कदम नहीं उठाया, तो आरोपियों के हौसले बुलंद हो गए। गुलशेर उर्फ प्रधान ने फोन करके पीड़ित परिवार को चौकी बुलाया, जहां उन पर मानसिक दबाव बनाकर अंगूठा लगवाया गया। इसके बाद ग्राम झलरा ले जाकर बच्ची का जबरन निकाह पढ़वा दिया गया। इस पूरे षड्यंत्र में निम्नलिखित लोगों को नामजद किया गया है!
उस्मान (मुख्य आरोपी – जिसने दुराचार किया)
इरशाद (उस्मान के पिता)
गुलशेर उर्फ प्रधान (जिसने षड्यंत्र रचा)
आंसू हाफिज (जिसने निकाह पढ़ाया)
बिन्नी, गुलजार उर्फ पप्पू, एहसान, सोनू, आसिफ उर्फ फसिया, जहीरुद्दीन, रुखसार, मुस्कान, वसीम उर्फ कालू, अजीमा और लगभग 15 अन्य अज्ञात व्यक्ति।

कानून की उड़ी धज्जियां: 7 माह की गर्भवती है मासूम

यह मामला न केवल पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) का उल्लंघन है, बल्कि बाल विवाह अधिनियम 2006 के तहत भी एक दंडनीय अपराध है। सबसे विचलित करने वाली बात यह है कि ‘चाइल्डलाइन’ और ‘बाल कल्याण समिति’ की काउंसलिंग के बावजूद अब तक पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं किया है। वर्तमान में 14 साल की वह बच्ची सात माह की गर्भवती है, जिसे उचित चिकित्सा और पोषण की सख्त दरकार है।
उच्चाधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग

पीड़ित मां ने अब ‘डीके फाउंडेशन ऑफ फ्रीडम एंड जस्टिस’ के माध्यम से डीजीपी उत्तर प्रदेश, एडीजी बरेली जोन और एसपी बिजनौर को पत्र लिखकर न्याय की गुहार लगाई है। मांग की गई है कि!
दोषियों पर तत्काल पॉक्सो एक्ट और बाल विवाह अधिनियम के तहत कार्रवाई हो।
लापरवाह पुलिसकर्मियों पर जांच बैठाई जाए।
पीड़िता को उचित मुआवजा और चिकित्सा सहायता प्रदान की जाए।
क्या बिजनौर प्रशासन इस मासूम की चीख सुनेगा! या रसूखदारों के दबाव में यह मामला फाइलों में ही दबा रह जाएगा! यह एक बड़ा सवाल है।

  • इंद्र यादव – सीआरएस न्यूज़,मुंबई
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