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ममता भी हार गई हालात से: मां ने तीन साल की बेटी संग ट्रेन के सामने कूदकर दी जान


वाराणसी। (इंद्र यादव) उत्तर प्रदेश जिले के जंसा थाना क्षेत्र में सोमवार शाम घटी एक दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया। चौखंडी रेलवे क्रॉसिंग के पास एक मां ने अपनी तीन वर्षीय मासूम बेटी को सीने से लगाकर ट्रेन के सामने छलांग लगा दी। कुछ ही पलों में मां-बेटी की जिंदगी पटरी पर थम गई और पीछे रह गया चीख-पुकार, सन्नाटा और कई अनुत्तरित सवाल।
मिली जानकारी के अनुसार जंसा थाना क्षेत्र के लक्ष्छीपुर रामेश्वर गांव निवासी अजीत कुमार अपनी पत्नी अनीता देवी और तीन वर्षीय बेटी दर्शना को दवा दिलाने के लिए भाऊपुर बाजार लेकर गया था। बताया जा रहा है कि अनीता देवी पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ थीं। दवा लेने के बाद जब परिवार घर लौट रहा था, तभी चौखंडी रेलवे स्टेशन के पास एक दुकान पर पानी पीने के लिए वे लोग रुक गए।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पानी पीते समय अनीता देवी ने अपने पति से जंसा जाकर अपनी एक सहेली से मिलने की बात कही। पति ने इसे सामान्य बातचीत समझकर ज्यादा ध्यान नहीं दिया और आगे चलने की तैयारी करने लगा। उसी समय वाराणसी से भदोही की ओर जा रही सारनाथ एक्सप्रेस ट्रेन वहां से गुजरने वाली थी।
इसी बीच अचानक अनीता देवी ने अपनी मासूम बेटी को गोद में उठाया और तेजी से रेलवे ट्रैक की ओर दौड़ पड़ीं। जब तक आसपास मौजूद लोग कुछ समझ पाते या उन्हें रोकने की कोशिश करते, तब तक वह बेटी को सीने से लगाए ट्रेन के सामने कूद चुकी थीं। ट्रेन की चपेट में आने से मां और बेटी दोनों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।
यह मंजर इतना भयावह था कि वहां मौजूद लोग सन्न रह गए। कुछ देर के लिए पूरे इलाके में अफरा-तफरी और चीख-पुकार मच गई। पति अजीत कुमार घटनास्थल पर ही बदहवास होकर रोने लगा। जिसने भी यह दृश्य देखा, उसकी आंखें नम हो गईं।
सूचना मिलते ही जंसा थाना पुलिस और जीआरपी की टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि प्रथम दृष्टया मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है, हालांकि घटना के पीछे की वास्तविक वजह जानने के लिए हर पहलू से जांच की जा रही है।
स्थानीय लोगों के अनुसार अजीत कुमार मजदूरी और वेल्डिंग का काम करता है और रोजगार के सिलसिले में अक्सर दूसरे प्रदेशों में रहता है। बताया जा रहा है कि वह करीब दो महीने पहले ही घर लौटा था। घटना के समय वह पत्नी और बेटी को दवा दिलाने गया था, लेकिन किसी को अंदाजा भी नहीं था कि रास्ते में इतनी बड़ी त्रासदी उनका इंतजार कर रही है।
मृतका अनीता देवी का मायका जंसा थाना क्षेत्र के सतनुपुर गांव में बताया जा रहा है। घटना की खबर मिलते ही मायके और ससुराल पक्ष के लोग भी मौके पर पहुंच गए। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है।
यह हादसा केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि समाज के लिए भी एक गंभीर सवाल छोड़ गया है। आखिर ऐसी कौन-सी पीड़ा या मानसिक दबाव रहा होगा, जिसने एक मां को अपनी ही कोख के टुकड़े के साथ जीवन समाप्त करने जैसा कठोर कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ता मानसिक तनाव, पारिवारिक दबाव और सामाजिक अकेलापन कई बार लोगों को अंदर से तोड़ देता है। ऐसे समय में परिवार, समाज और आसपास के लोगों की संवेदनशीलता और संवाद ही किसी को ऐसे कदम उठाने से रोक सकती है।
फिलहाल इस दर्दनाक घटना से पूरे इलाके में शोक की लहर है और हर कोई मां-बेटी की असमय मौत से स्तब्ध है। वहीं पुलिस मामले की गहराई से जांच कर आत्महत्या के पीछे की असली वजह तलाशने में जुटी हुई है।

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