यूपी के खाकी का ‘हेयर कट’ ऑफर और 10 साल का सरकारी ‘वेकेशन’ !
फर्रुखाबाद,उत्तर प्रदेश (इंद्र यादव) फर्रुखाबाद से एक ऐसी खबर आई है जिसने ‘पुलिस हमारी मित्र है’ वाले बोर्ड पर जमी धूल झाड़ दी है। आमतौर पर पुलिस अपराधियों की खातिरदारी करती है, लेकिन यहाँ के एक दरोगा जी और सिपाही जी को ‘क्रिएटिविटी’ का ऐसा दौरा पड़ा कि उन्होंने वकीलों को ही अपना शिकार बना लिया।
न्यायालय ने अब इस ‘क्रिएटिव’ जोड़ी को 10 साल के सश्रम कारावास का ‘गिफ्ट वाउचर’ थमाया है।
रातभर चली ‘स्पेशल सर्विस’
मामला पुराना है लेकिन सजा ताजा-ताजा है। दरोगा जी और सिपाही जी ने कोतवाली को रातभर के लिए ‘सैलून और टॉर्चर रूम’ में बदल दिया था। वकीलों को बंधक बनाया गया, उनकी चोटी काटी गई (शायद उन्हें लगा होगा कि वकीलों की ताकत बालों में होती है), और ‘फीस’ के तौर पर मोबाइल और नकदी भी रख ली गई। इसे कहते हैं—पूरी रात की ड्यूटी और ऊपर से
कोर्ट का फैसला: जब ‘रक्षक’ ही ‘भक्षक’ बन जाए
यूपी के खाकी का ‘हेयर कट’ ऑफर और 10 साल का सरकारी ‘वेकेशन’ !
फर्रुखाबाद,उत्तर प्रदेश (इंद्र यादव) फर्रुखाबाद से एक ऐसी खबर आई है जिसने ‘पुलिस हमारी मित्र है’ वाले बोर्ड पर जमी धूल झाड़ दी है। आमतौर पर पुलिस अपराधियों की खातिरदारी करती है, लेकिन यहाँ के एक दरोगा जी और सिपाही जी को ‘क्रिएटिविटी’ का ऐसा दौरा पड़ा कि उन्होंने वकीलों को ही अपना शिकार बना लिया।
न्यायालय ने अब इस ‘क्रिएटिव’ जोड़ी को 10 साल के सश्रम कारावास का ‘गिफ्ट वाउचर’ थमाया है।
मामला पुराना है लेकिन सजा ताजा-ताजा है। दरोगा जी और सिपाही जी ने कोतवाली को रातभर के लिए ‘सैलून और टॉर्चर रूम’ में बदल दिया था। वकीलों को बंधक बनाया गया, उनकी चोटी काटी गई (शायद उन्हें लगा होगा कि वकीलों की ताकत बालों में होती है), और ‘फीस’ के तौर पर मोबाइल और नकदी भी रख ली गई। इसे कहते हैं—पूरी रात की ड्यूटी और ऊपर से कोर्ट का फैसला: जब ‘रक्षक’ ही ‘भक्षक’ बन जाए सुनवाई के दौरान जब सबूत और गवाह पेश हुए, तो वर्दी की चमक फीकी पड़ गई। कोर्ट ने साफ कर दिया कि कानून की किताब में ‘चोटी काटना’ और ‘लूटपाट करना’ पुलिस की ड्यूटी का हिस्सा नहीं है। परिणाम!
सजा: 10-10 साल की कठोर जेल (अब चोटी काटने की कैंची नहीं, पत्थर तोड़ने वाला हथौड़ा मिलेगा)
जुर्माना: 61-61 हजार रुपये (जो शायद उस रात की ‘लूट’ से काफी महंगा पड़ गया)
हैरानी की बात तो यह रही कि 10 साल की सजा सुनने के बाद भी साहबों की ‘हेकड़ी’ कम नहीं हुई। जब दोषी पुलिसकर्मी कोर्ट से बाहर निकले, तो उनके चेहरे के हाव-भाव ऐसे थे मानो जेल नहीं, किसी फाइव स्टार होटल के उद्घाटन पर जा रहे हों। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो देखकर जनता कन्फ्यूज है कि ये सजा का गम मना रहे हैं या ‘न्यू लुक’ पर चर्चा कर रहे हैं।
इस फैसले ने उन लोगों को करारा जवाब दिया है जो समझते हैं कि वर्दी पहनकर वे ‘सिंघम’ बन गए हैं। अब अगले 10 साल तक दरोगा जी और सिपाही जी को न तो किसी का मोबाइल छीनना पड़ेगा और न ही किसी की चोटी काटनी होगी। जेल के अंदर अनुशासन सीखने के लिए उनके पास काफी लंबा समय है।
Indra Yadav/Correspondent- Ishan Times….🙏..✍️सुनवाई के दौरान जब सबूत और गवाह पेश हुए, तो वर्दी की चमक फीकी पड़ गई। कोर्ट ने साफ कर दिया कि कानून की किताब में ‘चोटी काटना’ और ‘लूटपाट करना’ पुलिस की ड्यूटी का हिस्सा नहीं है। परिणाम!
सजा: 10-10 साल की कठोर जेल (अब चोटी काटने की कैंची नहीं, पत्थर तोड़ने वाला हथौड़ा मिलेगा)
जुर्माना: 61-61 हजार रुपये (जो शायद उस रात की ‘लूट’ से काफी महंगा पड़ गया)।
हैरानी की बात तो यह रही कि 10 साल की सजा सुनने के बाद भी साहबों की ‘हेकड़ी’ कम नहीं हुई। जब दोषी पुलिसकर्मी कोर्ट से बाहर निकले, तो उनके चेहरे के हाव-भाव ऐसे थे मानो जेल नहीं, किसी फाइव स्टार होटल के उद्घाटन पर जा रहे हों। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो देखकर जनता कन्फ्यूज है कि ये सजा का गम मना रहे हैं या ‘न्यू लुक’ पर चर्चा कर रहे हैं।
इस फैसले ने उन लोगों को करारा जवाब दिया है जो समझते हैं कि वर्दी पहनकर वे ‘सिंघम’ बन गए हैं। अब अगले 10 साल तक दरोगा जी और सिपाही जी को न तो किसी का मोबाइल छीनना पड़ेगा और न ही किसी की चोटी काटनी होगी। जेल के अंदर अनुशासन सीखने के लिए उनके पास काफी लंबा समय है।
Indra Yadav/Correspondent- Ishan Times….🙏..✍️



