सीहोर (इंद्र यादव) मध्य प्रदेश,कहते हैं कि डॉक्टर भगवान का रूप होते हैं, लेकिन मध्य प्रदेश के सीहोर जिले से जो खबर आई है, उसने इस भरोसे को तार-तार कर दिया है। एक महिला की मौत हो गई, उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया, लेकिन जब चिता की राख ठंडी हुई, तो जो सच सामने आया उसने सबको झकझोर कर रख दिया। राख के ढेर में मिली— एक लोहे की सर्जिकल कैंची।
क्या है पूरा मामला!
सीहोर की रहने वाली एक महिला ने हाल ही में परिवार नियोजन के लिए नसबंदी का ऑपरेशन करवाया था। परिवार को उम्मीद थी कि अब जीवन सामान्य होगा, लेकिन ऑपरेशन के बाद से ही महिला की तबीयत बिगड़ने लगी। उसे पेट में असहनीय दर्द रहने लगा। डॉक्टरों ने शायद इसे सामान्य दर्द बताया होगा, लेकिन हकीकत कुछ और ही थी। कुछ ही समय बाद उस महिला की मौत हो गई।
राख ने उगला सिस्टम का ‘गुनाह’
परिजनों ने भारी मन से महिला का अंतिम संस्कार किया। अगले दिन जब परिवार के लोग परंपरा के अनुसार ‘फूल’ (अस्थियां) चुनने श्मशान पहुंचे, तो वहां का नजारा देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। राख के बीच एक सर्जिकल कैंची पड़ी हुई थी। यह वही कैंची थी, जिसे डॉक्टर नसबंदी के दौरान महिला के पेट के अंदर ही भूल गए थे।
एक परिवार की तबाही और सुलगते सवाल
यह सिर्फ एक मेडिकल लापरवाही नहीं है, बल्कि एक हंसते-खेलते परिवार की तबाही है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। उनके मन में कुछ चुभते हुए सवाल हैं:
क्या ऑपरेशन के बाद प्रोटोकॉल के तहत औजारों की गिनती नहीं की गई थी?
एक मासूम माँ की तड़प और चीखें क्या डॉक्टरों को सुनाई नहीं दीं!
इस लापरवाही की कीमत जो उस परिवार ने चुकाई है, क्या उसकी भरपाई कभी हो पाएगी?
“हमने तो उसे विदा कर दिया था, लेकिन हमें क्या पता था कि वह अपने साथ सिस्टम की वो बेरहमी भी ले गई, जिसने उसे धीरे-धीरे अंदर से खत्म कर दिया।” — एक शोकाकुल परिजन
प्रशासन में हड़कंप
सोशल मीडिया पर इस खबर के वायरल होने और राख में मिली कैंची की तस्वीरों ने स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा दिया है। फिलहाल मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं, लेकिन सवाल वही है— क्या जांच से वह माँ वापस आ पाएगी!
यह घटना हमारे समाज और चिकित्सा व्यवस्था के लिए एक काला धब्बा है। यह याद दिलाती है कि जब जिम्मेदारी निभाने में चूक होती है, तो किसी के घर का चिराग हमेशा के लिए बुझ जाता है।



