लखनऊ। उत्तर प्रदेश की नौकरशाही से जुड़ा एक चर्चित मामला फिर सुर्खियों में है। करीब एक वर्ष पहले एक करोड़ रुपये की रिश्वत मांगने के आरोप में निलंबित किए गए आईएएस अधिकारी Abhishek Prakash को राज्य सरकार ने बहाल कर दिया है। शिकायतकर्ता द्वारा अदालत में अपने आरोपों से मुकर जाने के बाद यह फैसला लिया गया है। इस घटनाक्रम ने भ्रष्टाचार के मामलों में जांच प्रक्रिया और गवाहों की विश्वसनीयता को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।सोलर प्रोजेक्ट की फाइल से जुड़ा था मामलाजानकारी के अनुसार पूरा विवाद एक सोलर इंडस्ट्री प्रोजेक्ट की फाइल को लेकर शुरू हुआ था। आरोप था कि उस समय संबंधित विभाग में तैनात आईएएस अधिकारी अभिषेक प्रकाश ने अपने करीबी कर्मचारी निकांत जैन के माध्यम से कारोबारी Vishwajeet Datta से फाइल क्लियर करने के बदले एक करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी थी।यह भी आरोप लगाया गया कि रकम न मिलने पर प्रोजेक्ट की फाइल को जानबूझकर लंबित रखा गया।STF ने की थी कार्रवाईमामला मुख्यमंत्री तक पहुंचने के बाद Uttar Pradesh Special Task Force को जांच सौंपी गई थी। जांच के दौरान कर्मचारी निकांत जैन को रंगे हाथों पकड़कर गिरफ्तार किया गया था। बताया गया था कि उसने पूछताछ में स्वीकार किया था कि वह यह सौदा अपने अधिकारी के निर्देश पर कर रहा था।एसटीएफ की रिपोर्ट के आधार पर राज्य सरकार ने आईएएस अभिषेक प्रकाश को निलंबित कर दिया था।अदालत में पलटी शिकायतहालांकि मामला बाद में Allahabad High Court की लखनऊ खंडपीठ पहुंचा। सुनवाई के दौरान मुख्य शिकायतकर्ता विश्वजीत दत्ता ने अपने पूर्व आरोपों से मुकरते हुए अदालत में हलफनामा दाखिल किया और कहा कि शिकायत “गलतफहमी” के कारण दर्ज कराई गई थी।शिकायतकर्ता के बयान बदलने के बाद अदालत ने मामले को निरस्त कर दिया।निलंबन समाप्त, सेवा में वापसीअदालती फैसले के बाद राज्य सरकार ने अभिषेक प्रकाश का निलंबन समाप्त करते हुए उन्हें सेवा में बहाल कर दिया। फिलहाल उन्हें फिर से प्रशासनिक कार्यों में तैनाती दी गई है।उठ रहे कई सवालइस पूरे घटनाक्रम के बाद कई सवाल भी उठ रहे हैं। जांच एजेंसी की कार्रवाई, कर्मचारी के कथित स्वीकारोक्ति बयान और बाद में शिकायतकर्ता के मुकरने के कारण मामले की पारदर्शिता पर चर्चा हो रही है।विशेषज्ञों का मानना है कि जब बड़े मामलों में शिकायतकर्ता या गवाह अपने बयान बदल देते हैं, तो भ्रष्टाचार के मामलों में कानूनी कार्रवाई कमजोर पड़ जाती है।फिलहाल अधिकारी की बहाली के साथ मामला औपचारिक रूप से समाप्त हो गया है, लेकिन यह प्रकरण प्रशासनिक व्यवस्था और जांच प्रक्रिया को लेकर बहस का विषय बना हुआ है।
करोड़ों की रिश्वत के आरोप में निलंबित IAS अभिषेक प्रकाश बहाल, शिकायतकर्ता के मुकरने के बाद पलटा मामल
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