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बलात्कारी बाबा की मददगार महिला आयोग की अध्यक्ष कैसे – सपकाल की वो ‘कड़ियां’ जो हिला देंगी महाराष्ट्र की सियासत!

मुंबई (इंद्र यादव) महाराष्ट्र की राजनीति में ‘स्वयंभू भगवान’ कैप्टन अशोक खरात की गिरफ्तारी के बाद अब एक नया और बेहद आपत्तिजनक मोड़ आ गया है। इस मामले में एक कथित ‘लीक वीडियो’ के सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है, जिसने राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रूपाली चाकणकर की घेराबंदी को और भी आक्रामक बना दिया है।
27 वर्षीय महिला द्वारा लगाए गए दो साल तक यौन शोषण के आरोपों के बीच, अब डिजिटल साक्ष्यों ने इस मामले को “राज्य का सबसे बड़ा सेक्स स्कैंडल” बनाने की ओर धकेल दिया है।

‘लीक वीडियो’ का सनसनीखेज सच: क्या है इसमें

जैसे ही नागपुर पुलिस ने 18 मार्च को खरात को सलाखों के पीछे भेजा, सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में एक वीडियो तेजी से वायरल होने लगा।
आपत्तिजनक सामग्री: सूत्रों के अनुसार, इस लीक वीडियो में आरोपी बाबा को पीड़ित महिला के साथ बेहद आपत्तिजनक स्थिति में देखा जा रहा है।
ब्लैकमेलिंग का हथियार: पीड़िता का आरोप है कि खरात ऐसे वीडियो का इस्तेमाल उसे चुप रखने और बार-बार शोषण करने के लिए ‘हथियार’ के रूप में करता था।
अंधविश्वास का खेल: वीडियो में कथित तौर पर बाबा को ‘दैवीय शक्ति’ और ‘आध्यात्मिक शांति’ के नाम पर महिला को गुमराह करते हुए देखा जा सकता है।
पुलिस की जांच: नागपुर पुलिस ने इस वीडियो को साक्ष्य के तौर पर जब्त कर लिया है और इसकी फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है ताकि यह साफ हो सके कि बाबा ने ऐसी कितनी और महिलाओं का शिकार किया है।

विपक्ष का तीखा प्रहार: “वीडियो के बाद अब चुप्पी क्यों

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने इस लीक वीडियो का हवाला देते हुए रूपाली चाकणकर पर सीधा हमला बोला है।
“जब सबूत वीडियो के रूप में सामने हैं, तो महिला आयोग की अध्यक्ष खामोश क्यों हैं? क्या उनका खरात की संस्था से इतना गहरा रिश्ता है कि वे एक बलात्कारी बाबा के खिलाफ बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही हैं? उन्हें तुरंत इस्तीफा देना चाहिए।” — हर्षवर्धन सपकाल

विपक्ष के 3 बड़े सवाल:

संरक्षण का आरोप: क्या रूपाली चाकणकर के रसूख के कारण ही अशोक खरात को अपनी संस्था के भीतर ऐसी गंदी हरकतों को अंजाम देने का साहस मिला!
पीड़िता का भरोसा: जब आयोग की प्रमुख का नाम ही आरोपी से जुड़ रहा हो, तो पीड़िता न्याय की उम्मीद कैसे करे?
संस्था का चंदा: क्या खरात की संस्था को मिलने वाले फंड में चाकणकर की कोई भूमिका थी!

जांच का बढ़ता दायरा: 24 मार्च तक की मोहलत

कोर्ट ने आरोपी बाबा को 24 मार्च तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है। पुलिस अब इन बिंदुओं पर जांच केंद्रित कर रही है!हिडन कैमरा और डिवाइस: क्या खरात के आश्रम या ठिकानों पर गुप्त कैमरे लगे थे!
अन्य पीड़ित: क्या इस लीक वीडियो के अलावा और भी महिलाओं के वीडियो बनाकर उन्हें ब्लैकमेल किया गया!
VVIP कनेक्शन: बाबा के फोन कॉल रिकॉर्ड्स (CDR) खंगाले जा रहे हैं ताकि यह पता चल सके कि किन बड़े नेताओं और अधिकारियों से उसकी नियमित बातचीत होती थी।

परिणाम: चाकणकर के लिए ‘अग्निपरीक्षा’

यह मामला अब केवल एक आपराधिक घटना नहीं रह गया है, बल्कि आगामी चुनावों से पहले एक बड़ा राजनीतिक हथियार बन गया है। रूपाली चाकणकर के लिए अपनी छवि बचाना एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि विपक्ष इस ‘लीक वीडियो’ को आधार बनाकर सरकार को घेरने की कोई कसर नहीं छोड़ रहा है।

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