गुजरात (इंद्र यादव) अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने सूरत में एक ऐसा ‘आध्यात्मिक स्टार्टअप’ पकड़ा है, जिसे देखकर शार्क टैंक के जज भी अपना सिर पकड़ लेते। यहाँ मोक्ष का मार्ग सीधा प्रिंटिंग मशीन से होकर गुजर रहा था। आइए, विस्तार से समझते हैं कि कैसे ‘श्री सत्य योग फाउंडेशन’ में योग के नाम पर ‘उद्योग’ चल रहा था।
आश्रम का ‘मायाजाल’: बाहर माला, अंदर छाला!
सूरत के कामरेज तालुका के धोरण पारडी गांव में यह आश्रम किसी शांत तपोवन जैसा दिखता था। लोग सोचते थे कि यहाँ जाकर आत्मा को शांति मिलेगी, लेकिन अंदर बैठे ‘महारथी’ देश की अर्थव्यवस्था को अशांत करने में जुटे थे।
दिखावा: योग, ध्यान और सत्संग।
असली धंधा: हाई-क्वालिटी प्रिंटर, बढ़िया कागज और जाली स्याही का संगम। ये लोग ‘सत्य योग’ के नाम पर ‘असत्य नोट’ छाप रहे थे।
2 करोड़ का ‘प्रसाद’ और 6 ‘भक्त’ गिरफ्तार
पुलिस ने जब छापा मारा, तो उन्हें वहां कोई प्राचीन पांडुलिपि नहीं, बल्कि 2 करोड़ रुपये से ज्यादा के नकली नोट मिले। ये नोट इतने ‘असली’ दिखने की कोशिश कर रहे थे कि अगर इन्हें धूप में न सुखाया जाए, तो शायद बैंक वाले भी धोखा खा जाते।
पुलिस ने 6 दिग्गजों को दबोचा है, जो अब जेल की कोठरी में ‘एकांतवास’ और ‘मौन व्रत’ का पालन करेंगे।
इनके पास से नोट छापने की मशीनें, कटर और ढेर सारा कच्चा माल मिला है।
कैसे चलता था यह ‘दिव्य’ नेटवर्क
जांच में सामने आया है कि यह कोई छोटा-मोटा फुटकर काम नहीं था। यह एक प्रॉपर ‘कॉर्पोरेट फ्रॉड’ था.
सूरत बना हेडक्वार्टर: सूरत को इस काले धंधे का केंद्र बनाया गया क्योंकि यहाँ व्यापार ज्यादा है, तो नोट खपाना आसान था।धार्मिक कवच: आश्रम को इसलिए चुना गया क्योंकि पुलिस आमतौर पर मंदिर-आश्रमों के अंदर घुसकर प्रिंटर नहीं चेक करती। उन्हें लगा कि ‘भगवा’ चोला पहन लेंगे तो ‘खाकी’ वाले सलाम ठोकेंगे।
इकोनॉमी की ‘खिंचाई’ और पुलिस की ‘धुलाई’
इन लोगों का प्लान था मार्केट में इतने नकली नोट उतार देना कि असली और नकली में फर्क करना मुश्किल हो जाए। लेकिन अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने इनके ‘प्लान’ का ‘योगा’ कर दिया।
इन आरोपियों ने सोचा था कि ‘लक्ष्मी’ खुद चलकर आएगी, पर उन्हें क्या पता था कि लक्ष्मी के साथ ‘सरस्वती’ (पुलिस की डायरी) और ‘यमराज’ (कानून का डंडा) भी आएंगे!
सावधानी ही बचाव है
इस खबर के बाद, अगर कोई बाबा आपको ‘धन वर्षा’ का लालच दे, तो समझ जाना कि बारिश ‘इंकजेट प्रिंटर’ से होने वाली है। 500 का नोट लेते समय गांधी जी की तस्वीर के साथ-साथ यह भी देख लें कि कहीं नोट से ‘आश्रम की अगरबत्ती’ की खुशबू तो नहीं आ रही!



