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नासिक सेक्स-स्कैंडल: ‘कैप्टन बाबा’ का काला साम्राज्य ध्वस्त, 58 आपत्तिजनक वीडियो से सत्ता-प्रशासन में हड़कंप

मुंबई/नासिक, विशेष संवाददाता। इंद्र यादव 

महाराष्ट्र के नासिक से एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने न सिर्फ धार्मिक आस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि सत्ता और प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली को भी कटघरे में ला खड़ा किया है। खुद को ज्योतिषी और ‘अमृतदाता’ बताने वाला अशोक खरात उर्फ ‘कैप्टन बाबा’ अब सलाखों के पीछे है। उस पर आरोप है कि उसने प्रभावशाली लोगों के परिवारों की महिलाओं को अपने जाल में फंसाकर उनका शोषण किया और फिर आपत्तिजनक वीडियो बनाकर ब्लैकमेलिंग का संगठित नेटवर्क खड़ा कर लिया।

आस्था के नाम पर अपराध का साम्राज्य का पुलिस जांच और सूत्रों के मुताबिक, अशोक खरात ने पिछले कुछ वर्षों में नासिक और मुंबई के रसूखदार लोगों के बीच अपनी पैठ बना ली थी। शुरुआत में वह भविष्यवाणी और पूजा-पाठ के जरिए लोगों का विश्वास जीतता था। बताया जाता है कि एक बड़े राजनीतिक चेहरे के संपर्क में आने के बाद उसका प्रभाव तेजी से बढ़ा और देखते ही देखते मंत्री, विधायक, सांसद और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उसके संपर्क में आ गए।

लेकिन इस धार्मिक आवरण के पीछे एक संगठित और खतरनाक खेल चल रहा था। आरोप है कि खरात महिलाओं को भविष्य का भय दिखाकर या मानसिक रूप से प्रभावित कर अपने प्रभाव में लेता था और फिर उनके साथ आपत्तिजनक कृत्य करता था।

58 वीडियो: ‘राजदार फाइल’ से बढ़ी बेचैनी

मामले की जांच के दौरान पुलिस को अब तक 58 आपत्तिजनक वीडियो मिलने की पुष्टि हुई है। इन वीडियो में कथित रूप से कई प्रतिष्ठित परिवारों की महिलाएं दिखाई दे रही हैं।

सूत्रों का कहना है कि इन वीडियो के सामने आने के बाद कई प्रभावशाली परिवारों में दहशत का माहौल है। बदनामी के डर से कई पीड़ित सामने आने से बच रहे हैं, जिससे जांच और भी जटिल हो गई है।

ऑफिस कर्मचारी बना ‘व्हिसलब्लोअर’

इस पूरे मामले का खुलासा एक अंदरूनी व्यक्ति के जरिए हुआ। जानकारी के अनुसार, खरात के कार्यालय में काम करने वाले एक कर्मचारी ने सीसीटीवी फुटेज अपने कब्जे में ले लिए थे। इसके बाद ब्लैकमेलिंग का सिलसिला शुरू हुआ, जिसमें करोड़ों रुपये की मांग की गई।

स्थिति तब बदली जब एक पीड़ित महिला ने साहस दिखाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। इसी शिकायत के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई शुरू की और पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ।

फिल्मी अंदाज में ‘ऑपरेशन खरात’

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए नासिक पुलिस ने बेहद गोपनीय तरीके से कार्रवाई की। आधी रात को विशेष टीम गठित कर आरोपी के ठिकानों की घेराबंदी की गई।

सूत्रों के अनुसार, पुलिस ने दरवाजा खुलवाने के लिए इलाके में ‘चोर घुसने’ की सूचना का सहारा लिया। जैसे ही दरवाजा खुला, टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए अशोक खरात को हिरासत में ले लिया।

पुलिस का कहना है कि आरोपी विदेश भागने की तैयारी में था और उसके पास ऑस्ट्रेलिया जाने के लिए आवश्यक दस्तावेज भी मौजूद थे। समय रहते लुकआउट नोटिस जारी कर उसकी फरारी पर रोक लगा दी गई।

सत्ता के गलियारों तक पहुंची जांच की गंभीरता को देखते हुए राज्य स्तर पर विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच में सामने आने वाले हर नाम की निष्पक्ष जांच की जाएगी, चाहे वह कितना ही प्रभावशाली क्यों न हो।

सूत्रों के अनुसार, इस मामले में कई राजनीतिक और प्रशासनिक चेहरों के नाम सामने आने की संभावना है, जिसके चलते पूरे राज्य में हलचल मची हुई है।

जमीन सौदे ने बढ़ाई सियासी गर्मी के बीच जांच के दौरान एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आया है। दस्तावेजों के मुताबिक, नासिक के पाथर्डी क्षेत्र में एक जमीन की खरीद में अशोक खरात की पत्नी और एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी की पत्नी की संयुक्त भागीदारी पाई गई है।

इस जमीन की कीमत दस्तावेजों में लगभग 71 लाख रुपये दर्शाई गई है, जबकि बाजार मूल्य इससे अधिक बताया जा रहा है। इस सौदे को लेकर अब यह सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह लेनदेन वैध स्रोतों से किया गया था या इसके पीछे किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता छिपी हुई है।

अंधविश्वास और प्रभाव का खतरनाक मेल देख कर विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला सिर्फ आपराधिक गतिविधि तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में फैले अंधविश्वास और प्रभाव के दुरुपयोग का भी गंभीर उदाहरण है।

जब प्रभावशाली वर्ग ही तथाकथित बाबाओं के प्रभाव में आ जाता है, तो ऐसे मामलों के पनपने की संभावना और बढ़ जाती है।

आगे की राह तलाश रही पुलिस फिलहाल  डिजिटल साक्ष्यों की गहन जांच कर रही है और पीड़ितों से सामने आने की अपील कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

अगर देखा जाए तो नासिक का यह मामला न केवल एक बड़े आपराधिक नेटवर्क का खुलासा है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कैसे आस्था की आड़ में विश्वास का दुरुपयोग किया जा सकता है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच कितनी गहराई तक जाती है और क्या सभी जिम्मेदार लोगों को कानून के दायरे में लाया जा सकेगा

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