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विशेष संवाददाता –CRS NEWS
उत्तर प्रदेश में बुनियादी ढांचे को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया जा रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार जल्द ही 330 किलोमीटर लंबे ‘विंध्य एक्सप्रेसवे’ परियोजना की आधारशिला रखने जा रही है। यह महत्वाकांक्षी कॉरिडोर पूर्वांचल और विंध्य क्षेत्र को जोड़ते हुए प्रदेश को चार राज्यों—बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और झारखंड—से सीधा कनेक्ट करेगा।यह एक्सप्रेसवे प्रयागराज के सोरांव तहसील स्थित जुड़ापुर दांदू गांव से शुरू होकर मिर्जापुर होते हुए सोनभद्र तक जाएगा। खास बात यह है कि यह मार्ग गंगा एक्सप्रेसवे से सीधे जुड़कर दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से संपर्क को बेहद आसान बना देगा।84 गांवों में जमीन अधिग्रहण तेजपरियोजना के लिए प्रयागराज प्रशासन ने कुल 84 गांवों को चिन्हित किया है, जहां जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। इसमें सोरांव के 29, फूलपुर के 24 और हंडिया के 31 गांव शामिल हैं। प्रशासनिक स्तर पर किसानों से संवाद और मुआवजा प्रक्रिया को गति दी जा रही है, ताकि निर्माण कार्य जल्द शुरू हो सके।आर्थिक विकास का नया गलियाराविंध्य एक्सप्रेसवे केवल सड़क परियोजना नहीं, बल्कि ‘इकोनॉमिक कॉरिडोर’ के रूप में विकसित होगा। मिर्जापुर और सोनभद्र के खनिज और औद्योगिक उत्पादों को अब दिल्ली-एनसीआर के बाजार तक पहुंचाने में समय और लागत दोनों में कमी आएगी। इससे व्यापार, उद्योग और स्थानीय रोजगार को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।पर्यटन को मिलेगा नया पंखइस एक्सप्रेसवे के बनने से विंध्याचल धाम और सोनभद्र के इको-टूरिज्म स्थलों तक पहुंच आसान हो जाएगी। धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन में वृद्धि से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।प्रयागराज बनेगा ट्रांजिट हबतीन प्रमुख तहसीलों—सोरांव, फूलपुर और हंडिया—से गुजरते हुए यह एक्सप्रेसवे प्रयागराज को एक बड़े ट्रांजिट और लॉजिस्टिक हब के रूप में विकसित करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना पूर्वी यूपी के विकास की दिशा बदल सकती है।निष्कर्ष:‘विंध्य एक्सप्रेसवे’ यूपी के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है। बेहतर कनेक्टिविटी, तेज परिवहन, बढ़ता निवेश और रोजगार के नए अवसर—ये सभी इस मेगा प्रोजेक्ट को राज्य के विकास की नई धुरी बना सकते हैं।



