राष्ट्रीय लोक अदालत में 56 हजार से अधिक मामलों का निस्तारण

भदोही, 09 मई 2026।राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण एवं उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण भदोही-ज्ञानपुर के तत्वावधान में जनपद न्यायालय परिसर, सरपतहा ज्ञानपुर में राष्ट्रीय लोक अदालत का भव्य आयोजन किया गया।


कार्यक्रम का शुभारंभ माननीय जनपद न्यायाधीश अखिलेश दूबे के मार्गदर्शन में मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।लोक अदालत में इस बार एक अत्यंत भावुक दृश्य देखने को मिला,

जब वर्षों से अलग रह रहे दो दंपतियों ने आपसी सहमति से अपने वैवाहिक जीवन को नई शुरुआत देने का निर्णय लिया। परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश रत्नेशमणि त्रिपाठी के मार्गदर्शन तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव आशीष कुमार सिंह की मध्यस्थता से दोनों वैवाहिक विवाद सुलझे। दंपतियों ने एक-दूसरे को वरमाला पहनाकर साथ रहने की शपथ ली, जिससे पूरा सभागार भावुक हो उठा।जिलाधिकारी शैलेष कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत केवल कानूनी विवादों के समाधान का मंच नहीं, बल्कि सामाजिक सौहार्द और पारिवारिक एकता को सुदृढ़ करने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि संवाद और सहमति से विवादों का समाधान समाज को मजबूत बनाता है।इस लोक अदालत में कुल 68,079 मामले संदर्भित किए गए, जिनमें से 56,956 मामलों का निस्तारण किया गया। बैंक प्री-लिटिगेशन के 764 मामलों में 2 करोड़ 81 लाख 51 हजार 139 रुपये की वसूली हुई। एनआई एक्ट के मामलों में 5 लाख रुपये तथा बिजली बकाया मामलों में 49.78 लाख रुपये की समझौता धनराशि तय की गई। प्रशासनिक एवं राजस्व के 52,888 मामलों का भी निस्तारण कर 10 लाख 87 हजार 615 रुपये अर्थदंड वसूला गया।माननीय जिला जज अखिलेश दूबे ने कहा कि लोक अदालत सस्ता, सुलभ और त्वरित न्याय का माध्यम है, जिसमें किसी की हार-जीत नहीं होती, बल्कि आपसी सहमति से विवाद समाप्त होते हैं। उन्होंने न्यायालय परिसर का भ्रमण कर वादकारियों की समस्याएं भी सुनीं।कार्यक्रम में पुलिस अधीक्षक अभिनव त्यागी, मुख्य विकास अधिकारी बाल गोविन्द शुक्ल सहित न्यायिक अधिकारी, अधिवक्ता, बैंक अधिकारी और बड़ी संख्या में वादकारी उपस्थित रहे। विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए “एक जनपद एक उत्पाद”, सोलर लाइट और “ताना-बाना” स्टॉल आकर्षण का केंद्र रहे।राष्ट्रीय लोक अदालत ने एक बार फिर साबित किया कि आपसी समझ, सहमति और संवाद से न केवल मुकदमे खत्म होते हैं, बल्कि टूटते रिश्ते भी फिर से जुड़ सकते हैं।



