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46 साल बाद आया फैसला: प्रयागराज कचहरी हत्याकांड में विजय मिश्रा दोषी, शाम 4 बजे सजा पर निर्णय

ज्ञानपुर की राजनीति से अपराध जगत तक चर्चा में रहे पूर्व विधायक पर अदालत का बड़ा फैसला

संवाददाता : प्रिंस गुप्ता की रिपोर्ट

भदोही प्रयागराज। उत्तर प्रदेश की राजनीति और अपराध जगत से जुड़े सबसे चर्चित मामलों में शामिल प्रयागराज कचहरी हत्याकांड में आखिरकार 46 वर्ष बाद अदालत का फैसला आ गया।

ज्ञानपुर विधानसभा सीट से चार बार विधायक रहे विजय मिश्रा को एमपी-एमएलए कोर्ट ने हत्या के मामले में दोषी करार दिया है। अदालत ने विजय मिश्रा के साथ तीन अन्य आरोपियों को भी दोषी माना है।

अब इस बहुचर्चित मामले में आज शाम 4 बजे सजा का ऐलान किया जाएगा।यह मामला 12 फरवरी 1980 का है, जब प्रयागराज कचहरी परिसर में हतिगहां निवासी रज्जन पांडे उर्फ प्रकाश नारायण पांडे की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उस समय इस घटना ने पूरे प्रदेश में सनसनी फैला दी थी, क्योंकि अदालत परिसर जैसी सुरक्षित जगह पर हुई हत्या ने कानून-व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए थे। मामले में विजय मिश्रा और उनके परिवार से जुड़े अन्य लोगों को नामजद किया गया था।गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर दोष सिद्धएमपी-एमएलए कोर्ट में लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयान के आधार पर विजय मिश्रा, जीत नारायण, संतराम और बलराम को दोषी माना। मामले की सुनवाई जज योगेश कुमार थर्ड की अदालत में हुई। अदालत ने फैसला सुरक्षित रखने के बाद दोष सिद्ध होने की घोषणा की और अब सभी आरोपियों की सजा पर फैसला सुनाया जाएगा।वर्तमान में विजय मिश्रा जेल में बंद हैं और उनकी पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कराई गई। उन पर हत्या, रंगदारी, गैंगस्टर, अपहरण और अन्य गंभीर धाराओं में कई मुकदमे दर्ज हैं। बताया जाता है कि उनके खिलाफ 70 से अधिक आपराधिक मामले विभिन्न जिलों में दर्ज रहे हैं।भदोही की राजनीति में बड़ा नाम रहे विजय मिश्रापूर्व विधायक विजय मिश्रा लंबे समय तक पूर्वांचल की राजनीति में प्रभावशाली चेहरा माने जाते रहे हैं। ज्ञानपुर विधानसभा सीट से उन्होंने चार बार जीत हासिल की और क्षेत्रीय राजनीति में मजबूत पकड़ बनाई। हालांकि समय के साथ उन पर कई गंभीर आपराधिक आरोप लगे, जिसके कारण उनका राजनीतिक सफर लगातार विवादों में घिरा रहा।प्रदेश की राजनीति में विजय मिश्रा का नाम अक्सर बाहुबली नेताओं की सूची में लिया जाता रहा है। हाल के वर्षों में उनके खिलाफ कानून का शिकंजा लगातार कसता गया और कई मामलों में उन्हें दोषसिद्ध भी किया गया।46 साल बाद फैसले का क्या है महत्व?करीब आधी सदी पुराने इस मामले में आया फैसला केवल एक हत्या के मुकदमे का निर्णय नहीं माना जा रहा, बल्कि यह न्यायिक प्रक्रिया की निरंतरता और कानून के लंबे हाथ का प्रतीक भी बन गया है। ऐसे मामले, जो वर्षों तक अदालतों में लंबित रहते हैं, उनमें फैसला आने से यह संदेश जाता है कि न्याय में देर हो सकती है, लेकिन न्यायिक प्रक्रिया रुकती नहीं है।विशेषज्ञों का मानना है कि एमपी-एमएलए कोर्ट द्वारा पुराने राजनीतिक और आपराधिक मामलों में तेजी से सुनवाई करना न्याय व्यवस्था की जवाबदेही को मजबूत करता है। वहीं राजनीतिक गलियारों में भी इस फैसले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।अब सबकी नजर सजा परदोष सिद्ध होने के बाद अब सबसे बड़ी चर्चा इस बात को लेकर है कि अदालत विजय मिश्रा और अन्य दोषियों को कितनी सजा सुनाती है। चूंकि मामला हत्या का है और घटना अदालत परिसर में हुई थी, इसलिए फैसले को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शाम 4 बजे होने वाले सजा के ऐलान पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हुई।

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