मुंबई/ (इंद्र यादव)।महाराष्ट्र में प्याज उत्पादक किसानों की हालत बद से बदतर होती जा रही है। जिस प्याज को कभी ‘लाल सोना’ कहा जाता था, वही आज किसानों के लिए घाटे का सौदा बन गया है। मंडियों में 1 रुपये प्रति किलो के भाव ने किसानों को तोड़कर रख दिया है। हालात ऐसे हैं कि कुछ किसान अपनी खून-पसीने की कमाई को आग के हवाले करने को मजबूर हो गए हैं।4 एकड़ की मेहनत बनी राखधाराशिव जिले के भूम तालुका के टिंटराज गांव के किसान भगवान साबले ने अपनी 4 एकड़ में तैयार की गई प्याज की फसल में आग लगा दी।करीब 3 से 4 लाख रुपये की लागत से उगाई गई फसल की पैदावार लगभग 600 बोरी रही, लेकिन मंडी में महज 1 रुपये प्रति किलो का भाव मिल रहा था।किसान का कहना है कि इस कीमत पर प्याज बेचने से परिवहन और मजदूरी का खर्च भी नहीं निकलता। ऐसे में हताश होकर उन्होंने पूरी फसल जला दी। खेत में धू-धू कर जलती प्याज की बोरियां किसानों की बेबसी की गवाही दे रही थीं।12 क्विंटल बेचा, जेब से देना पड़ा 1 रुपयाछत्रपति संभाजीनगर जिले के पैठण तालुका के वरुडी गांव के किसान प्रकाश गलधर 1262 किलो (करीब 25 बोरी) प्याज लेकर मंडी पहुंचे।1 रुपये किलो के हिसाब से उन्हें 1262 रुपये मिले, लेकिन हमाली, तुलाई और अन्य खर्च मिलाकर 1263 रुपये काट लिए गए।नतीजा यह रहा कि किसान को अपनी जेब से 1 रुपया अतिरिक्त देना पड़ा। तीन महीने की मेहनत के बाद यह परिणाम किसानों के लिए किसी सदमे से कम नहीं है।क्यों टूट रहा है किसान?विशेषज्ञों के अनुसार मौजूदा संकट के पीछे कई कारण हैं—इस वर्ष बंपर पैदावार से मंडियों में अधिक आवकनिर्यात नीतियों में अस्थिरतापर्याप्त कोल्ड स्टोरेज की कमीबीज, खाद, कीटनाशक और डीजल की बढ़ती लागतउत्पादन लागत बढ़ने के बावजूद बाजार भाव गिरकर वर्षों पुराने स्तर पर पहुंच गया है।किसानों की मांगकिसान संगठनों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनकी प्रमुख मांगें हैं—प्याज के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) घोषित किया जाएसरकारी खरीद केंद्र तुरंत खोले जाएंप्रभावित किसानों को प्रति एकड़ मुआवजा दिया जाएसरकार के सामने चुनौतीइन घटनाओं ने राज्य की कृषि व्यवस्था और मंडी प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो किसानों का आक्रोश व्यापक आंदोलन का रूप ले सकता है।‘लाल सोना’ उगाने वाले अन्नदाता की आंखों में आज आंसू हैं। खेतों में लगी आग सिर्फ प्याज की फसल नहीं जला रही, बल्कि किसानों के सपनों और उम्मीदों को भी राख कर रही है।
अन्नदाता की आंखों में आंसू: 600 बोरी प्याज को किसान ने लगाई आग, मंडी में 1 रुपये किलो का भाव
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