Homeआज की ताजा खबरअमेरिका का 'मिशन ईरान' फेल! क्या खुद के बिछाए जाल में फंस...

अमेरिका का ‘मिशन ईरान’ फेल! क्या खुद के बिछाए जाल में फंस गया सुपरपावर!

मुंबई (इंद्र यादव) अमेरिका का मुख्य उद्देश्य ईरान के प्रभाव को कम करना और मध्य-पूर्व के संसाधनों पर अपनी पकड़ मजबूत करना था। उसे लगा था कि ताकत के दम पर वह ईरान को घुटने टेकने पर मजबूर कर देगा। लेकिन गणित उल्टा पड़ गया!

अकेला पड़ता सुपरपावर: अमेरिका को उम्मीद थी कि उसके पुराने साथी (जैसे जर्मनी और अन्य यूरोपीय देश) इस लड़ाई में उसका साथ देंगे। लेकिन जर्मनी ने साफ कह दिया कि वह किसी ऐसे युद्ध का हिस्सा नहीं बनेगा जो यूरोप के हितों में नहीं है।

रूस और चीन का रुख: अमेरिका के इस कदम ने ईरान को रूस और चीन के और करीब ला दिया है, जिससे वैश्विक राजनीति में नए समीकरण बन रहे हैं।

होर्मुज स्ट्रेट: ईरान का सबसे बड़ा हथियार

अगर दुनिया की अर्थव्यवस्था एक शरीर है, तो होर्मुज स्ट्रेट उसकी गर्दन है।
तेल की नाकाबंदी: दुनिया का लगभग 20-30% कच्चा तेल इसी संकरे रास्ते से गुजरता है। ईरान ने इसे रोकने की धमकी देकर या आंशिक रूप से बाधित करके पूरी दुनिया के शेयर बाजार और तेल बाजार में खलबली मचा दी है।
महंगाई का खतरा: यदि यहाँ से सप्लाई रुकी, तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें किसी एक देश में नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में बढ़ेंगी। इससे शिपिंग चार्ज बढ़ेगा और हर छोटी-बड़ी चीज महंगी हो जाएगी।

कूटनीति बनाम सैन्य शक्ति

इस संकट ने एक बात साफ कर दी है कि आज के दौर में केवल मिसाइलों और सेना के दम पर जीत हासिल नहीं की जा सकती
जर्मनी का संदेश: जर्मनी का पीछे हटना यह दिखाता है कि अब पश्चिमी देश भी अमेरिका की ‘युद्ध वाली नीति’ से थक चुके हैं। वे व्यापार और शांति को प्राथमिकता दे रहे हैं।
अहंकार की कीमत: अमेरिका के लिए अब स्थिति यह है कि अगर वह पीछे हटता है तो उसकी छवि कमजोर होगी, और अगर आगे बढ़ता है तो वैश्विक मंदी का खतरा बढ़ जाएगा।

इस संकट का भारत पर क्या असर होगा

चूँकि भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा तेल आयात करता है, इसलिए यह संकट हमारे लिए सीधा खतरा है.
महंगाई: पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने से माल ढुलाई महंगी होगी, जिसका असर सब्जियों और राशन के दामों पर पड़ेगा।
रुपये की गिरावट: कच्चे तेल के लिए अधिक डॉलर देने होंगे, जिससे भारतीय रुपया कमजोर हो सकता है।
शेयर बाजार में अस्थिरता: अनिश्चितता के माहौल में निवेशक अपना पैसा निकालने लगते हैं।

अमेरिका ने जिस ‘मिशन ईरान’ को अपनी जीत समझा था, वह अब एक ऐसी उलझन बन गया है जिससे निकलना मुश्किल हो रहा है। दुनिया अब एक ऐसे मोड़ पर है जहाँ एक गलत फैसला वैश्विक शांति को दशकों पीछे धकेल सकता है।

USIranConflict #GlobalOilCrisis #StraitOfHormuz #NATODivision #EconomicImpact #MiddleEastTension #PeaceOverWar #OilSupplyChain #GlobalEconomy #Geopolitics

RELATED ARTICLES
Jharkhand
few clouds
35.6 ° C
35.6 °
35.6 °
29 %
2.7kmh
21 %
Mon
37 °
Tue
38 °
Wed
41 °
Thu
44 °
Fri
44 °

Most Popular