भदोही विशेष संवाददाता
उत्तर प्रदेश भदोही जिलाधिकारी (कलेक्टर) न्यायालय ने राजस्व चोरी के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक करते हुए लालानगर टोल प्लाजा मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। डीएम ने स्टाम्प शुल्क की भारी कमी पाए जाने पर कंपनी के खिलाफ 62.87 करोड़ रुपये की वसूली और करीब 6.28 करोड़ रुपये का भारी-भरकम अर्थदण्ड (जुर्माना) लगाने का आदेश दिया है।क्या है पूरा मामलायह पूरा विवाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHI) और काशी टोलवेज प्राइवेट लिमिटेड के बीच हुए एक ‘कन्सेशन एग्रीमेंट’ से जुड़ा है। 18 मार्च 2023 को हुए इस समझौते के तहत कंपनी को 15 साल के लिए टोल वसूली, मैनेजमेंट और रखरखाव का अधिकार मिला था। इस डील की कुल कीमत 3,144 करोड़ रुपये तय की गई थी।100 रुपये के स्टाम्प पर चल रहा था 3100 करोड़ का खेलजांच में जो खुलासा हुआ, उसने प्रशासन के होश उड़ा दिए। जिस डील की कीमत 3144 करोड़ रुपये थी, उसे महज 100 रुपये के स्टाम्प पेपर पर निष्पादित कर दिया गया था।नियम क्या कहता है: जिलाधिकारी न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यह एग्रीमेंट ‘पट्टा विलेख’ की श्रेणी में आता है।कितना शुल्क बनता था: कानूनी गणना के अनुसार, इस डील पर 62,88,00,000 रुपये (62.88 करोड़) का स्टाम्प शुल्क चुकाया जाना चाहिए था।चोरी पकड़ी गई: कंपनी ने केवल 100 रुपये दिए, यानी सीधे तौर पर 62,87,99,900 रुपये की राजस्व चोरी की गई।DM कोर्ट के फैसले की बड़ी बातेंजिलाधिकारी ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के ‘रीवा टोलवे प्रा. लि. बनाम मध्य प्रदेश राज्य’ मामले का हवाला देते हुए कड़ा रुख अपनाया। कोर्ट ने साफ कहा कि टोल वसूली के समझौते ‘पट्टा’ ही माने जाएंगे और उन पर पूरा टैक्स देना होगा!प्रदेश के बड़े स्टाम्प वादों में शामिल08 मई 2026 को सुनाया गया यह फैसला उत्तर प्रदेश के राजस्व इतिहास के सबसे बड़े फैसलों में से एक माना जा रहा है। सहायक महानिरीक्षक निबंधन की रिपोर्ट पर शुरू हुई इस कानूनी लड़ाई ने कॉरपोरेट जगत में हड़कंप मचा दिया है। जिलाधिकारी के इस कदम को जनहित और विधिक पारदर्शिता की दिशा में एक नजीर माना जा रहा है।साफ संदेश: अब रसूखदार कंपनियां ‘एग्रीमेंट’ की आड़ में सरकार के राजस्व को चूना नहीं लगा पाएंगी। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि बकाया राशि की वसूली ब्याज सहित की जाएगी।



