विशेष संवाददाता: राजेश जायसवाल, सीआरएस न्यूज
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में पराजय के बाद भी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पद छोड़ने से साफ इनकार कर दिया है। प्रेस वार्ता में उन्होंने दो टूक कहा—“आमी इस्तीफा ना देबो”। उनके इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और अब सबकी निगाहें राजभवन की भूमिका पर टिक गई हैं।संविधान के अनुसार मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल करते हैं और वे “राज्यपाल के प्रसादपर्यंत” पद पर बने रहते हैं। लेकिन यह व्यवस्था विधानसभा में बहुमत पर आधारित होती है। यदि कोई दल या गठबंधन बहुमत खो देता है, तो सरकार का बने रहना संभव नहीं होता।राज्यपाल ऐसी स्थिति में मुख्यमंत्री से सदन में विश्वास मत साबित करने को कह सकते हैं। यदि सरकार बहुमत सिद्ध नहीं कर पाती, तो मुख्यमंत्री को पद छोड़ना पड़ता है। जरूरत पड़ने पर राज्यपाल उन्हें बर्खास्त भी कर सकते हैं और बहुमत प्राप्त दल को सरकार बनाने का न्योता दे सकते हैं।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस्तीफा न देने का बयान राजनीतिक संदेश हो सकता है, लेकिन इससे सत्ता परिवर्तन की संवैधानिक प्रक्रिया प्रभावित नहीं होगी। नई विधानसभा के गठन और परिणामों की अधिसूचना के बाद बहुमत के आधार पर ही नई सरकार का गठन तय होगा।लोकतांत्रिक परंपरा यही कहती है कि बहुमत ही सत्ता का आधार है। ऐसे में अंतिम फैसला विधानसभा की संख्या शक्ति से ही होगा, न कि किसी व्यक्तिगत घोषणा से।



