लोग कह रहे हैं— “विपक्ष की क्या ज़रूरत, जब अपने ही काफी हैं!”
मोदीनगर (इंद्र यादव) उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसे सुनकर लोग कह रहे हैं— “विपक्ष की क्या ज़रूरत, जब अपने ही काफी हैं!” मामला बीजेपी के जिला उपाध्यक्ष और महिला मोर्चा की एक पदाधिकारी के बीच का है, जहाँ ‘डिजिटल प्रेम’ और ‘अभद्र मैसेज’ ने अब पुलिस थाने का रास्ता पकड़ लिया है।मैसेज भेजने में ‘सुपरफास्ट’, कार्रवाई में पुलिस ‘पैसेंजर’कहा जा रहा है कि बीजेपी के जिला उपाध्यक्ष जी ने जोश-जोश में महिला पदाधिकारी को कुछ ऐसी तस्वीरें और मैसेज भेज दिए, जिन्हें देखकर महिला मोर्चा का पारा सातवें आसमान पर पहुँच गया। उन्होंने पुलिस से गुहार लगाई, लेकिन पुलिस को लगा कि मामला ‘घर’ (पार्टी) का है, तो शायद सुलझ जाएगा। इसलिए पुलिस शुरू में “देखते हैं, करते हैं” वाले मोड में रही।महिला आयोग की एंट्री और पुलिस की ‘दौड़’जब पुलिस ढीली पड़ी, तो मामला उत्तर प्रदेश महिला आयोग की दहलीज पर जा पहुँचा। आयोग की सदस्य ने जब पुलिस की कार्यशैली पर अपनी ‘भृकुटी’ तानी और फटकार लगाई, तो जो पुलिस अब तक ‘वेटिंग’ में थी, उसने तुरंत ‘एक्सप्रेस’ की रफ़्तार पकड़ी और माननीय उपाध्यक्ष जी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया।संगठन में ‘हड़कंप’, हाईकमान को ‘जुकाम’इधर पुलिस ने केस दर्ज किया, उधर बीजेपी संगठन में ऐसी हलचल मची है जैसे बिना मौसम बरसात आ गई हो। खबर है कि मामला अब दिल्ली दरबार (हाईकमान) तक पहुँच गया है। अब कार्यकर्ता दबी जुबान में कह रहे हैं— “भैया, डिजिटल इंडिया का मतलब ये थोड़े ही था कि कुछ भी फॉरवर्ड कर दो!”आज की सीख: पद छोटा हो या बड़ा, अगर अंगूठा मोबाइल की स्क्रीन पर बेकाबू हुआ, तो सीधा ‘हवालात’ का रास्ता खुलता है।#Ghaziabad #Modinagar #BJP #PoliticsUpdate #HindiNews #SocialMediaC



