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यूपी में नए बिजली कनेक्शन पर बड़ी राहत, उपभोक्ता खुद चुन सकेंगे मीटरस्मार्ट के साथ इलेक्ट्रॉनिक मीटर का भी विकल्प, कीमतों में कटौती


लखनऊ।
उत्तर प्रदेश में नया बिजली कनेक्शन लेने वाले उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है। अब वे अपनी पसंद के अनुसार स्मार्ट मीटर या इलेक्ट्रॉनिक (नॉन-स्मार्ट) मीटर का चुनाव कर सकेंगे। राज्य विद्युत नियामक आयोग ने नई कॉस्ट डाटा बुक में इलेक्ट्रॉनिक मीटरों की व्यवस्था बरकरार रखते हुए उनकी कीमतों में भी कटौती की है।
इलेक्ट्रॉनिक मीटर सस्ते हुए
नियामक आयोग द्वारा तय नई दरों के अनुसार—
सिंगल फेज इलेक्ट्रॉनिक मीटर: 767 रुपये (पहले 872 रुपये)
थ्री फेज इलेक्ट्रॉनिक मीटर: 1853 रुपये
आयोग के आदेश के बाद उपभोक्ता नियमों के तहत स्मार्ट मीटर के बजाय इलेक्ट्रॉनिक मीटर की मांग कर सकते हैं, और बिजली वितरण कंपनियां इससे इनकार नहीं कर सकेंगी।
स्मार्ट मीटर और प्रीपेड पर विवाद जारी
प्रदेश में 10 सितंबर 2025 से नए बिजली कनेक्शन केवल स्मार्ट मीटर के साथ दिए जा रहे थे, वह भी प्रीपेड मोड में। प्रीपेड मीटर को अनिवार्य किए जाने को लेकर मामला पहले से ही नियामक आयोग में विचाराधीन है।
आरोप है कि पावर कॉरपोरेशन ने विद्युत अधिनियम-2003 की धारा 47(5) का उल्लंघन किया है, जिसमें उपभोक्ताओं को प्रीपेड या पोस्टपेड कनेक्शन चुनने का अधिकार दिया गया है।
नई कॉस्ट डाटा बुक से बढ़ा विवाद
31 दिसंबर को मंजूर की गई 65 पेज की नई कॉस्ट डाटा बुक के एनेक्सचर-29 (पेज 64) में स्मार्ट मीटरों के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक मीटरों की कीमतें तय की गई हैं। इसके बाद एक बार फिर मीटर नीति को लेकर बहस तेज हो गई है।
नोएडा और आगरा में अब भी इलेक्ट्रॉनिक मीटर
जहां प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं, वहीं नोएडा पावर कंपनी लिमिटेड और आगरा में टोरेंट पावर अब भी नए कनेक्शन पर इलेक्ट्रॉनिक मीटर ही लगा रही हैं।
सूत्रों के अनुसार, नियामक आयोग में हुई बैठकों में इन दोनों निजी कंपनियों ने इलेक्ट्रॉनिक मीटर को बरकरार रखने की मांग की थी।
नियामक आयोग में रखा जाएगा मामला
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष एवं बिजली आपूर्ति कोड समीक्षा पैनल उप समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि—
“कॉस्ट डाटा बुक बिजली कनेक्शन के लिए बाध्यकारी है। इसका उल्लंघन कोई भी कंपनी नहीं कर सकती। यदि इसमें इलेक्ट्रॉनिक मीटर का प्रावधान है, तो यह उपभोक्ताओं का अधिकार है।”
उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को नियामक आयोग के समक्ष उठाया जाएगा, ताकि पूरे प्रदेश में एक समान व्यवस्था लागू हो सके।

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